
अरपा को मिलेगा नया जीवन: उद्गम स्थल के विकास से लेकर 2,500 से ज्यादा संरक्षण कार्यों पर तेज हुई पहल
हाईकोर्ट में राज्य सरकार का शपथपत्र, प्रदूषण रोकने सीवेज परियोजनाओं और वैज्ञानिक निगरानी का खाका पेश
बिलासपुर। अरपा सहित प्रदेश की प्रमुख नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश की। मुख्य सचिव की ओर से दायर शपथपत्र में बताया गया कि अरपा नदी के उद्गम क्षेत्र के विकास, जलग्रहण क्षेत्र के संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और वैज्ञानिक मॉनिटरिंग के लिए व्यापक कार्ययोजना पर अमल शुरू हो चुका है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ को बताया गया कि पेंड्रा के अमरपुर स्थित अरपा के उद्गम स्थल के विकास के लिए करीब 4.81 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यहां प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित रखते हुए आकर्षक कुंड विकसित किया जाएगा। इसके लिए निर्माण एजेंसी का चयन और निविदा संबंधी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई हैं।
राज्य सरकार ने कोर्ट को यह भी अवगत कराया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की समीक्षा के बाद अरपा नदी बेसिन के संरक्षण और उद्गम क्षेत्र के वैज्ञानिक विकास का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
गंदे पानी को नदी तक पहुंचने से रोकने की तैयारी
अरपा नदी में शहरी अपशिष्ट जल के सीधे प्रवाह को रोकने के लिए पेंड्रा और गौरेला नगर पालिकाओं ने लगभग 18.49 करोड़ रुपये की परियोजनाएं तैयार कर शासन को भेजी हैं। इन योजनाओं को स्वीकृति मिलने के बाद आधुनिक सीवेज प्रबंधन ढांचा विकसित किया जाएगा, जिससे नदी में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।
जलग्रहण क्षेत्र में हजारों संरक्षण कार्य
अरपा नदी के कैचमेंट एरिया में जल संरक्षण और भू-जल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों के समन्वय से 2,500 से अधिक संरचनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें चेक डैम, कंटूर ट्रेंच, गली प्लग और गैबियन जैसी संरचनाएं शामिल हैं। विशेष रूप से उद्गम स्थल से शुरुआती दस किलोमीटर क्षेत्र में सैकड़ों जल संरक्षण कार्य कराए जा रहे हैं ताकि नदी के प्राकृतिक प्रवाह को मजबूत किया जा सके।
हरियाली बढ़ाने पर भी विशेष जोर
वन विभाग ने नदी के जलग्रहण क्षेत्र में 655 हेक्टेयर भूमि पर पौधरोपण पूरा कर लिया है। इसके अलावा वर्ष 2026-27 में नदी किनारे अतिरिक्त 30 हेक्टेयर क्षेत्र में सघन वृक्षारोपण किया जाएगा, जिससे मिट्टी का कटाव रुके और जल संरक्षण को मजबूती मिले।
जिला पंचायत सीईओ होंगे नोडल अधिकारी
सरकार ने अरपा नदी पुनर्जीवन अभियान से जुड़े सभी विभागों के बीच समन्वय और कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को सौंपी है। वे नदी के जलप्रवाह, जल गुणवत्ता और भू-जल स्तर की नियमित वैज्ञानिक निगरानी भी सुनिश्चित करेंगे।
डिजिटल मैपिंग और विशेषज्ञों की निगरानी
राज्य सरकार ने प्रदेश की प्रमुख नदियों के उद्गम स्थलों की प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल पर डिजिटल मैपिंग कराने का निर्णय लिया है। नदी संरक्षण की कार्ययोजना का तकनीकी परीक्षण आईआईटी रुड़की, एनआईटी रायपुर और सीएसवीटीयू भिलाई के विशेषज्ञ कर रहे हैं। इसके साथ ही विभिन्न योजनाओं और विभागों के बजट का समन्वय कर नदी पुनर्जीवन कार्यों को गति दी जा रही है।
जुलाई के अंत में होगा ‘स्रोत महोत्सव’
नदी संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह में राज्य स्तरीय ‘स्रोत महोत्सव’ और कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें देशभर के पर्यावरण विशेषज्ञ, तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और स्वयंसेवी संगठन शामिल होंगे। उनके सुझावों के आधार पर भविष्य की नदी पुनर्जीवन योजनाओं को और प्रभावी बनाया जाएगा।
