बिलासा महोत्सव में लेखक सुरेश सिंह बैस की पुस्तक “बोलती परछाइयां”का हुआ भव्य विमोचन
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, साहित्य और कला के संरक्षण–संवर्धन के उद्देश्य से पिछले लगभग 37 वर्षों से निरंतर सक्रिय संस्था बिलासा कला मंच द्वारा आयोजित बिलासा महोत्सव का 36वां आयोजन 14 मार्च को प्रथम दिवस पर लाल बहादुर शास्त्री स्कूल परिसर (गोलबाजार) में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह का समापन और अंतिम दिवस 15 मार्च को संपन्न होगा। इस सांस्कृतिक आयोजन ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि बिलासपुर की धरती लोक परंपराओं और साहित्यिक चेतना की सशक्त वाहक रही है।महोत्सव के प्रथम दिवस का सबसे प्रमुख आकर्षण अंचल के सुप्रसिद्ध लेखक, पत्रकार एवं साहित्यकार सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ की चर्चित कहानी-संग्रह पुस्तक बोलती परछाइयां का भव्य विमोचन रहा। समारोह में उपस्थित साहित्यप्रेमियों, कलाकारों और गणमान्य अतिथियों ने इस कृति का गर्मजोशी से स्वागत किया और लेखक के रचनात्मक योगदान की सराहना की।
संवेदना और मनोवैज्ञानिक गहराई से भरपूर है “बोलती परछाइयां”
इस पुस्तक में ‘शाश्वत’ जी की भाषा अत्यंत सरल, सहज और प्रवाहमयी है, जो पाठक को आरंभ से अंत तक बांधे रखती है। कम शब्दों में गहरी और प्रभावशाली बात कहने की उनकी शैली इस संग्रह की विशेष पहचान है। कहानियों का शिल्प जहाँ पारंपरिक कथा-परंपरा से जुड़ा है, वहीं आधुनिक सामाजिक विमर्शों की भी सार्थक अभिव्यक्ति इसमें दिखाई देती है।संवाद छोटे, सारगर्भित और प्रभावशाली हैं, जो कथानक की गति को बनाए रखते हैं। संग्रह की कई कहानियाँ मनोवैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित हैं, जिनमें लेखक पात्रों के बाहरी व्यवहार से अधिक उनके आंतरिक द्वंद्व, संवेदनात्मक संघर्ष और मानसिक उथल-पुथल को बड़ी सूक्ष्मता से उकेरते हैं। यही कारण है कि इस संग्रह का प्रत्येक पात्र पाठक को जीवंत और वास्तविक प्रतीत होता है।“बोलती परछाइयां” केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है। यह कृति हिंदी कहानी साहित्य की उस परंपरा को आगे बढ़ाती है जिसमें साहित्य को समाज का दर्पण माना गया है। तकनीकी युग की आपाधापी के बीच यह संग्रह हमें याद दिलाता है कि मनुष्यता, संवेदना और नैतिक मूल्यों का महत्व आज भी सर्वोपरि है।
मध्यप्रदेश के बालाघाट में भी हुआ पुस्तक का विमोचन
इस पुस्तक की साहित्यिक प्रतिष्ठा का प्रमाण यह भी है कि मध्यप्रदेश के बालाघाट में संस्कृति एवं साहित्य शोध परिषद के तत्वावधान में आयोजित सृजन महोत्सव 2026 के अवसर पर भी “बोलती परछाइयां” का विधिवत विमोचन किया गया।परिषद के संयोजक अशोक सिंहासने ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह पुस्तक मनोरंजन के साथ-साथ जीवन के अनुभवों और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त दस्तावेज है। उन्होंने लेखक सुरेश सिंह बैस को शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी वे इसी प्रकार की उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों से पाठकों को समृद्ध करते रहेंगे।

