
सुशासन तिहार गुजर गया लेकिन नहीं भरा सड़क का गड्डा, वार्ड 59 में एक माह से नहीँ बदला हालात..
जनता परेशान पार्षद बेबस, जोन कमिश्नर का वही रवैया- बहाने टालमटोल और जिम्मेदारी से दूरी !
बिलासपुर। सरकंडा के वार्ड क्रमांक 59 में एक माह से अधिक समय से सड़क धंसी हुई है, लेकिन नगर निगम और संबंधित विभाग अब तक समस्या का समाधान नहीं कर पाए हैं। अमृत जल मिशन के तहत बिछाई गई पाइपलाइन में रिसाव के कारण सड़क अंदर से खोखली होती गई और आखिरकार बीच सड़क पर बड़ा गड्ढा बन गया। गड्ढे में भरे कीचड़ और पानी के कारण राहगीरों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में मामूली रिसाव था, जिसे समय रहते ठीक किया जा सकता था, लेकिन लापरवाही के कारण अब पूरी सड़क खतरे में पड़ गई है। रात के समय गड्ढा दिखाई नहीं देता, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। लोगों ने खुद ही लकड़ी और कपड़ा लगाकर चेतावनी का इंतजाम किया है।
वार्ड पार्षद सुनीता जगत ने बताया कि पाइपलाइन पहले भी क्षतिग्रस्त हुई थी, जिसकी मरम्मत कराई गई थी। बाद में दोबारा पाइपलाइन टूटने पर इसकी शिकायत सुशासन तिहार में की गई थी। अधिकारियों ने जल्द मरम्मत का भरोसा दिया था, लेकिन आज तक हालात नहीं बदले।
इस मामले में जोन कमिश्नर विभा सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
सुशासन तिहार या सिर्फ कागजी समाधान?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुशासन तिहार की शुरुआत में की गई शिकायत, सुशासन तिहार के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद भी अनसुलझी क्यों है? जिस अभियान का उद्देश्य जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण बताकर प्रचारित किया गया, उसी अभियान में दर्ज शिकायत आज तक फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी। एक माह से अधिक समय से सड़क धंसी हुई है, लेकिन जिम्मेदार विभाग समाधान तक नहीं पहुंच पाया है। इससे लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं सुशासन तिहार सिर्फ कागजी उपलब्धियों और आंकड़ों तक ही सीमित तो नहीं है।
जनता परेशान, अधिकारी बेपरवाह–
क्षेत्रवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद सिर्फ आश्वासन मिले। हालत यह है कि सड़क से महज 500 मीटर दूर दो बड़े अस्पताल होने के बावजूद रास्ते की सुध लेने वाला कोई नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक एक एंबुलेंस भी रात में इस गड्ढे में फंस चुकी है। छोटे-मोटे हादसे लगातार हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मानो किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हों। लोगों का सवाल है कि जब शिकायत, जनप्रतिनिधि और सुशासन तिहार— तीनों के बावजूद समस्या जस की तस है, तो आखिर जवाबदेही किसकी तय होगी?
पार्षद की बेबसी भी आई सामने-
वार्ड पार्षद लगातार शिकायत कर रही हैं, लेकिन उनकी बात भी अधिकारियों पर असर नहीं डाल पा रही। जनता की चुनी हुई प्रतिनिधि खुद स्वीकार कर रही हैं कि शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि एक पार्षद की आवाज तक प्रशासन नहीं सुन रहा, तो आम नागरिकों की शिकायतों का क्या हाल होगा?
फोन नहीं उठाना ही समाधान?
क्षेत्रवासियों में जोन कमिश्नर के रवैये को लेकर गहरी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि समस्या बताने और जवाब मांगने की कोशिश की जाए तो फोन तक नहीं उठाया जाता। जनता का तर्क है कि यदि अधिकारी संवाद से ही दूरी बना लें तो समस्याओं का समाधान कैसे होगा? ऐसे में लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि जिम्मेदार अफसरों को जनता की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं रह गया है।
लोगों का सवाल-
“सुशासन तिहार की शुरुआत में शिकायत हुई, तिहार खत्म होने को है, लेकिन सड़क अब भी धंसी है। फिर सुशासन आखिर दिख कहां रहा है?”
