
नेहरू सामुदायिक भवन में सामाजिक तत्वों ने की तोड़फोड़…..अधिकारियों ने पुलिस से की शिकायत
क्या सामुदायिक भवन है किसी की पर्सनल प्रॉपर्टी!
बिलासपुर। नेहरू नगर कॉलोनी स्थित सामुदायिक भवन में हुई तोड़फोड़ का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। प्रारंभिक शिकायत में जहां असामाजिक तत्वों द्वारा सरकारी भवन को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई थी, वहीं अब सामने आया है कि एक व्यक्ति ने उक्त भवन को अपनी निजी संपत्ति बताते हुए कुछ लोगों के साथ पहुंचकर तोड़फोड़ की कार्रवाई की। विभाग ने इस पूरे घटनाक्रम को कानून हाथ में लेने का मामला बताते हुए दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा विकसित नेहरू नगर कॉलोनी में स्थित सामुदायिक भवन में मंगलवार को कुछ लोगों ने प्रवेश कर भूतल और प्रथम तल के हिस्सों में तोड़फोड़ कर दी। घटना के दौरान भवन के कई हिस्सों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जिससे शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।
प्रत्यक्षदर्शियों और विभागीय सूत्रों के अनुसार, तोड़फोड़ का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति का दावा है कि संबंधित भूमि और भवन उसकी निजी संपत्ति है तथा उसके पास भवन हटाने के लिए न्यायालय का आदेश भी मौजूद है। इसी आधार पर वह अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचा और भवन के हिस्सों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
हालांकि विभागीय अधिकारियों ने इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि वास्तव में न्यायालय का कोई वैध आदेश मौजूद होता तो कार्रवाई नियमानुसार की जाती। ऐसे मामलों में पुलिस प्रशासन, राजस्व अधिकारी और संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहते हैं तथा पूरी प्रक्रिया उनकी निगरानी में संपन्न होती है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि “यदि कोर्ट का आदेश होता तो संबंधित पक्ष पुलिस और प्रशासन को सूचना देकर वैधानिक प्रक्रिया अपनाता। किसी भी स्थिति में लोगों को साथ लेकर भवन में घुसकर तोड़फोड़ करना न्यायालयीन आदेश के पालन की प्रक्रिया नहीं मानी जा सकती।”
घटना की सूचना पार्षद कार्तिक यादव द्वारा ढ़ी गईं। जिसके बाद विभागीय अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे तथा तोड़फोड़ को रुकवाया। इसके बाद नुकसान का आकलन शुरू किया गया। विभाग ने थाना सिविल लाइन में लिखित शिकायत देकर मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
विभाग का कहना है कि सामुदायिक भवन सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्मित किया गया है और लंबे समय से क्षेत्रवासियों के सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के लिए उपयोग में लाया जाता रहा है। ऐसे में बिना सक्षम प्राधिकरण की मौजूदगी और बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए भवन को नुकसान पहुंचाना गंभीर मामला है।
पुलिस अब शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह जांच करेगी कि संबंधित व्यक्ति के पास वास्तव में कोई न्यायालयीन आदेश है या नहीं तथा यदि है तो उसकी शर्तें क्या हैं। वहीं विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
विवाद का केंद्र: निजी संपत्ति या शासकीय भवन?
नेहरू नगर स्थित सामुदायिक भवन को लेकर अब स्वामित्व का विवाद भी सामने आ गया है। एक पक्ष जहां इसे अपनी निजी संपत्ति बता रहा है, वहीं गृह निर्माण मंडल और विभागीय अधिकारी इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए विकसित शासकीय परिसंपत्ति बता रहे हैं। ऐसे में पुलिस जांच और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
