BREAKING NEWS:सिविल सर्जन बोले- कलेक्टर के आदेश पर दे रहे है 18000 मानदेय, कलेक्टर कुंदन कुमार ने कहा- झूठे हैं डॉक्टर एमके राय
कलेक्टर बोले—मेरे आदेश की बात पूरी तरह गलत
बिलासपुर/मुंगेली। जिला चिकित्सालय मुंगेली की जीवन दीप समिति में वर्षों से कार्यरत रहे बाबू डी.एन. शर्मा को शिकायत के बाद सेवा से हटा दिया गया है। सेवानिवृत्ति के बाद करीब नौ वर्षों तक समिति में बने रहने को लेकर उठे सवालों के बीच अब समिति के माध्यम से हुई अन्य नियुक्तियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं। खासकर फिजियोथैरेपिस्ट उत्कर्ष पाठक को प्रतिमाह 18 हजार रुपये मानदेय दिए जाने को लेकर शिकायतकर्ताओं ने जांच की मांग की है। इस बीच नियुक्ति को कलेक्टर के आदेश से होने की बात सामने आने पर कलेक्टर कुंदन कुमार ने इसे पूरी तरह गलत बताते हुए ऐसे किसी आदेश से इनकार किया है।
शिकायत के बाद हटाए गए डी.एन. शर्मा-
जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय में जीवन दीप समिति के अंतर्गत कार्यरत बाबू बी.एन. शर्मा की नियुक्ति को लेकर संभाग आयुक्त बिलासपुर से शिकायत की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शर्मा सेवानिवृत्ति के बाद भी लगभग नौ वर्षों से समिति में पदस्थ थे, जबकि पुनर्नियुक्ति अथवा सेवा विस्तार के लिए आवश्यक प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियां उपलब्ध नहीं थीं।
शिकायत के परीक्षण के बाद कार्रवाई करते हुए उन्हें समिति से हटा दिया गया। मामले के सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि नियुक्ति नियमों के अनुरूप नहीं थी तो इतने लंबे समय तक यह व्यवस्था कैसे चलती रही।
अब उत्कर्ष पाठक की नियुक्ति पर उठे सवाल–
सूत्रों के अनुसार जिला चिकित्सालय में जीवन दीप समिति के माध्यम से फिजियोथैरेपिस्ट उत्कर्ष पाठक की नियुक्ति और उन्हें दिए जा रहे मानदेय को लेकर भी जाँच होना चाहिए। आरोप है कि उन्हें प्रतिमाह लगभग 18 हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि समिति के माध्यम से हुई नियुक्तियों, मानदेय भुगतान और वित्तीय प्रक्रियाओं की व्यापक जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
सिविल सर्जन ने दिया यह तर्क-
सिविल सर्जन सह अस्पताल मुख्य अधीक्षक डॉ. एम.के. राय ने कहा कि बी एन. शर्मा की उम्र 70 वर्ष से अधिक हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की आय का कोई अन्य स्रोत नहीं होता, उन्हें रखा जाता है, जबकि शर्मा को पेंशन मिलती है। वहीं उत्कर्ष पाठक की नियुक्ति के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उन्हें फिजियोथैरेपी सेवाओं के लिए नियुक्त किया गया है और उन्हें 18 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है।
कलेक्टर बोले—मेरे आदेश की बात झूठ–
उत्कर्ष पाठक की नियुक्ति को लेकर कलेक्टर के आदेश का हवाला दिए जाने पर कलेक्टर कुंदन कुमार ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है।
-समिति ही निर्णय लेती है कि क्या करना है। बाकी सब झूठ है, मैंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है।
— कुंदन कुमार, कलेक्टर, मुंगेली
क्या है जीवन दीप समिति?
जीवन दीप समिति शासकीय अस्पतालों में गठित एक प्रबंधन समिति होती है, जिसका उद्देश्य मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना और अस्पताल की आवश्यक व्यवस्थाओं का संचालन करना है। समिति अस्पताल के रखरखाव, उपकरण खरीद, संसाधन प्रबंधन और आवश्यक सेवाओं के संचालन से जुड़े निर्णय लेती है। समिति के माध्यम से होने वाली नियुक्तियां, मानदेय भुगतान और वित्तीय व्यय शासन के निर्धारित नियमों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप होना आवश्यक होता है।

