
गिरते जलस्तर पर सख्ती: बिलासपुर में 30 जून तक नए बोरवेल खनन पर प्रतिबंध
बिलासपुर। जिले में लगातार गिरते भू-जल स्तर और बढ़ते पेयजल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी संजय अग्रवाल ने 6 अप्रैल से पूरे जिले में नए नलकूप (बोरवेल) खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है, जो 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी। इस फैसले का उद्देश्य गर्मी के मौसम में जल संकट को नियंत्रित करना और भू-जल संरक्षण को बढ़ावा देना है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की रिपोर्ट के अनुसार, बिल्हा और तखतपुर विकासखण्डों में जलस्तर ‘सेमी-क्रिटिकल’ स्थिति में पहुंच चुका है। हालात की गंभीरता को देखते हुए बिलासपुर जिले के बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर और कोटा सहित पूरे जिले को ‘जलाभाव ग्रस्त’ घोषित किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के अब किसी भी निजी या अन्य प्रयोजन के लिए बोरवेल खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
महत्वपूर्ण जानकारी –
इस आदेश के तहत 6 अप्रैल से 30 जून तक पूरे बिलासपुर जिले में नए बोरवेल खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा। हालांकि पेयजल व्यवस्था को बनाए रखने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को खनन की अनुमति दी गई है। वहीं नगर निगम और नगर पंचायतों को भी अपने क्षेत्र में केवल पेयजल आपूर्ति के लिए बोरिंग कराने की छूट रहेगी, लेकिन इसके लिए संबंधित अधिकारियों को पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। यदि किसी नागरिक को अत्यंत आवश्यक स्थिति में बोरवेल खनन कराना हो, तो उन्हें संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से अनुमति लेनी होगी। आदेश का उल्लंघन करने पर छत्तीसगढ़ पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
