
भनवारटंक स्टेशन पर हाईटेक टनल कम्युनिकेशन सिस्टम शुरू,सुरंगों में अब निर्बाध संचार, ट्रेन संचालन और सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम
बिलासपुर। रेलवे संरक्षा और संचार व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भनवारटंक (BHTK) स्टेशन पर अत्याधुनिक टनल कम्युनिकेशन सिस्टम की सफल शुरुआत की गई है। महाप्रबंधक तरुण प्रकाश के निर्देशन में स्थापित इस प्रणाली से अब स्टेशन और अप-डाउन दोनों सुरंग खंडों के बीच निर्बाध संचार संभव हो गया है।
नई व्यवस्था के लागू होने से ट्रेन संचालन, रखरखाव कार्य और आपात स्थितियों में समन्वय पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और तेज हो सकेगा। यह प्रणाली विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी है, जहां पारंपरिक संचार साधन सुरंगों के भीतर काम नहीं कर पाते।
यह अत्याधुनिक सिस्टम वीएचएफ (वेरी हाई फ्रिक्वेंसी) तकनीक पर आधारित है, जो सुरंग जैसे जटिल वातावरण में भी मजबूत और स्पष्ट संचार सुनिश्चित करता है। ऑप्टिकल ट्रांसमिशन तकनीक और रेडियो फ्रीक्वेंसी के संयोजन से पूरी सुरंग में बेहतर सिग्नल कवरेज मिलता है।

प्रणाली के तहत स्टेशन पर ऑप्टिकल मास्टर यूनिट (ओएमयू) स्थापित की गई है, जो सुरंगों में लगे ऑप्टिकल रिमोट यूनिट्स (ओआरयू) से जुड़ी है। ये यूनिट्स रेडियो सिग्नलों को ऑप्टिकल सिग्नलों में बदलकर फाइबर नेटवर्क के जरिए संचारित करती हैं और फिर उन्हें पुनः रेडियो सिग्नल में बदलकर सुरंग के भीतर प्रसारित करती हैं। साथ ही लीकी केबल तकनीक के उपयोग से सुरंग के अंदर लगातार सिग्नल उपलब्ध रहता है।
इस परियोजना के तहत ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाने, एंटीना स्थापना, रिमोट यूनिट्स के संयोजन और निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए यूपीएस सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं सुनियोजित तरीके से पूरी की गईं। सिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए ग्राउंडिंग और सुरक्षा उपायों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
कमीशनिंग के दौरान ऑप्टिकल लिंक, सिग्नल गुणवत्ता और सिस्टम के विभिन्न मानकों का परीक्षण किया गया, जिसमें सुरंग की पूरी लंबाई में स्पष्ट और प्रभावी संचार की पुष्टि हुई। यह प्रणाली 146–163 मेगाहर्ट्ज वीएचएफ बैंड पर कार्य करती है और रेलवे के मानक उपकरणों के साथ पूरी तरह अनुकूल है।
भनवारटंक स्टेशन पर इस नई तकनीक की शुरुआत रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे न केवल आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी, बल्कि ट्रेन संचालन की समग्र दक्षता में भी वृद्धि होगी।
रेलवे का यह कदम आधुनिक, सुरक्षित और स्मार्ट परिवहन प्रणाली की दिशा में उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
