
“बोलती परछाइयाँ” जीवन के अनुभवों का संवेदनशील दस्तावेज: डॉ. राघवेंद्र दुबे
बिलासपुर। वरिष्ठ साहित्यकार व पत्रकार सुरेश सिंह बैस की पुस्तक “बोलती परछाइयाँ” को डॉ. राघवेंद्र कुमार दुबे ने एक अनुपम जीवन संस्मरण बताया है। उन्होंने कहा कि यह कृति लेखक के जीवन के विभिन्न अनुभवों, भावनाओं और संवेदनाओं को सरल व प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है।
डॉ. दुबे के अनुसार, पुस्तक में 18 संस्मरणों के माध्यम से प्रेम, स्नेह, रोमांस, डर और रहस्य जैसे भावों को जीवंत रूप में उकेरा गया है, जो पाठकों को बांधे रखते हैं। यह केवल घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन के गहरे अनुभवों का संवेदनशील चित्रण है।
उन्होंने बताया कि सुरेश सिंह बैस की लेखनी की विशेषता उनकी स्पष्टवादिता, निष्पक्षता और समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता है। वे लंबे समय से पत्रकारिता और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहकर अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
डॉ. दुबे ने पुस्तक के प्रकाशन पर उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह कृति पाठकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने और आत्ममंथन के लिए प्रेरित करने में सफल होगी।
