
राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में चमके बिलासपुर के मिहिर और अदिति जग्यासी
तबला वादन में मिहिर को प्रथम एवं गायन में अदिति को मिला द्वितीय स्थान
बिलासपुर। बी.टी.सी. कृषि महाविद्यालय सभागार में 26 से 29 जून तक आयोजित राष्ट्रीय स्तर के “नाद मंजरी” तृतीय सत्र प्रदर्शन एवं दृश्य कला महोत्सव एवं प्रतियोगिता में बिलासपुर के प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी कला का शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया। देशभर से आए प्रतिभागियों के बीच आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में नृत्य, संगीत, वाद्य वादन, चित्रकला एवं रेखाचित्र सहित विभिन्न विधाओं में कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता की कनिष्ठ एकल तबला वादन श्रेणी में मात्र 10 वर्षीय मिहिर जग्यासी ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति से निर्णायक मंडल और दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं वरिष्ठ एकल गायन ओपन श्रेणी में अदिति नीरज जग्यासी ने मधुर एवं भावपूर्ण गायन प्रस्तुत कर द्वितीय स्थान हासिल किया।
मिहिर जग्यासी भारतीय सिंधु सभा छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रदेश महामंत्री एवं विश्व हिन्दू परिषद बिलासपुर जिला के सेवा प्रमुख नीरज जग्यासी के सुपुत्र हैं, जबकि अदिति जग्यासी उनकी धर्मपत्नी हैं।
कम आयु में ही मिहिर ने जिस आत्मविश्वास, लयबद्धता और साधना का परिचय दिया, उसने उपस्थित कला प्रेमियों को प्रभावित कर दिया। उनकी प्रस्तुति को सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा गया। संगीत के प्रति उनकी गहरी रुचि और नियमित अभ्यास ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर यह उपलब्धि दिलाई है।
परिवार एवं गुरुजनों के मार्गदर्शन में पिछले तीन वर्षों से लगातार तबला साधना कर रहे मिहिर की सफलता को उनके कठिन परिश्रम और अनुशासन का परिणाम बताया जा रहा है। मिहिर ने अपनी उपलब्धि का श्रेय गुरुजनों, माता-पिता और परिवार के सहयोग को दिया है। उनका लक्ष्य भारतीय शास्त्रीय संगीत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक नई पहचान दिलाना है।
कार्यक्रम में उपस्थित कला प्रेमियों और संगीत साधकों ने मिहिर एवं अदिति की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। लोगों ने कहा कि बच्चों को यदि सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और उचित मंच मिले तो वे छोटी उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
मिहिर एवं अदिति की यह सफलता न केवल जग्यासी परिवार बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है। उनकी उपलब्धि भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आई है।
