
न्यू टाउन कॉलोनी पर बड़ा विवाद, सरकारी जमीन घेरने की आशंका !
बिलासपुर। सकरी तहसील के ग्राम पेंडारी में विकसित की जा रही न्यू टाउन कॉलोनी अब प्रशासनिक और कानूनी विवाद के केंद्र में आ गई है। एक ओर कॉलोनी के आकर्षक एंट्री गेट, आधुनिक डिजाइन और प्रीमियम हाउसिंग प्रोजेक्ट की तस्वीरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर कॉलोनी विकास की अनुमति में दर्ज सख्त शर्तों के संभावित उल्लंघन ने पूरे प्रोजेक्ट पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले का सबसे बड़ा विवाद कॉलोनी क्षेत्र के भीतर मौजूद शासकीय भूमि को लेकर है, जिस पर अतिक्रमण की आशंका जताई जा रही है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तखतपुर, जिला बिलासपुर द्वारा जारी कॉलोनी विकास अनुज्ञा के अनुसार यह परियोजना मेसर्स पाम ग्रीन, भागीदार एस.आर. साहू, नेहरू नगर बिलासपुर के नाम से स्वीकृत की गई है। कॉलोनी का विकास ग्राम पेंडारी, तहसील सकरी के विभिन्न खसरों की निजी भूमि पर किया जाना प्रस्तावित है, लेकिन दस्तावेजों में यह भी स्पष्ट है कि कुछ जमीन शासकीय श्रेणी में आती है, जिसे किसी भी स्थिति में निजी कॉलोनी विकास में शामिल नहीं किया जा सकता।
मौके से सामने आ रही तस्वीरों में कॉलोनी का भव्य गेट, चौड़ी सड़कें और चारों ओर घेराबंदी की तैयारी दिखाई दे रही है। राजस्व से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि घेराबंदी इसी तरह पूरी कर दी गई, तो कॉलोनी के भीतर स्थित सरकारी भूमि भी उसी दायरे में आ सकती है, जिससे उस पर व्यवहारिक कब्जे की स्थिति बन सकती है। इसे लेकर विभागीय स्तर पर आपत्ति भी दर्ज कराई गई है। आरोप है कि सीमांकन पारदर्शी तरीके से नहीं किया जा रहा और प्लानिंग इस तरह की जा रही है कि शासकीय खसरों को भी कॉलोनी के अंदर शामिल किया जा सके।
क्या कहती है अनुमति की शर्तें
कॉलोनी विकास की अनुमति में साफ उल्लेख है कि शासकीय भूमि को किसी भी हालत में कॉलोनी विकास में शामिल नहीं किया जाएगा। आदेश की शर्त क्रमांक 11 में स्पष्ट लिखा है कि सरकारी जमीन पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। वहीं शर्त क्रमांक 13 के अनुसार यदि अनुमति की किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो कॉलोनी विकास की स्वीकृति स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
इसका मतलब यह है कि पूरा प्रोजेक्ट केवल स्वीकृत निजी भूमि तक ही सीमित रहेगा और सीमांकन नियमों के अनुसार करना अनिवार्य है। यदि जांच में पाया जाता है कि सरकारी भूमि को घेराबंदी या विकास कार्य में शामिल किया गया है, तो प्रशासन को अनुमति रद्द करने, निर्माण रोकने और अतिक्रमण हटाने तक की कार्रवाई का अधिकार है।
निगरानी पर भी उठे सवाल
इस मामले ने प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब अनुमति आदेश में स्पष्ट शर्तें दर्ज हैं, तो यह सवाल उठ रहा है कि क्या संबंधित विभाग समय-समय पर स्थल निरीक्षण कर रहे हैं या नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सर्वे और सीमांकन नहीं किया गया, तो सरकारी जमीन पर कब्जे की स्थिति बन सकती है।
फिलहाल न्यू टाउन कॉलोनी का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन से तत्काल जांच, सीमांकन और स्पष्ट कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
