बिलासपुर। आम लोगों को सस्ती दर पर स्वच्छ और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर स्थापित किए गए आरओ वॉटर प्लांट आज खुद बदहाल स्थिति में पहुंच गए हैं। कभी 1 से 2 रुपये का सिक्का डालकर ठंडा और साफ पानी उपलब्ध कराने वाले ये प्लांट अब अधिकतर स्थानों पर बंद पड़े हैं। रखरखाव के अभाव और तकनीकी खराबियों के कारण इनकी उपयोगिता लगभग समाप्त हो चुकी है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है।
नगर निगम द्वारा यह पहल खास तौर पर राहगीरों, मरीजों के परिजनों, रिक्शा चालकों, मजदूरों और बाजार क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को राहत देने के लिए की गई थी। शहर के प्रमुख स्थानों जैसे नेहरू चौक, राघवेंद्र राव सभा भवन, जिला अस्पताल परिसर सहित अन्य सार्वजनिक जगहों पर आरओ प्लांट लगाए गए थे। इन प्लांटों का उद्देश्य था कि लोगों को महंगे बोतलबंद पानी पर निर्भर न रहना पड़े और न्यूनतम शुल्क में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
देखरेख के अभाव में बदहाल व्यवस्था–
वर्तमान में अधिकांश आरओ मशीनें तकनीकी खराबी के चलते बंद पड़ी हैं। कई स्थानों पर मशीनों के नल टूटे हुए हैं, फिल्टर समय पर नहीं बदले गए और बिजली कनेक्शन तक बाधित है। नियमित मॉनिटरिंग और मेंटेनेंस नहीं होने के कारण यह सुविधा धीरे-धीरे ठप हो गई। नागरिकों का कहना है कि पहले जहां दिनभर लोगों की कतार लगी रहती थी, वहीं अब मशीनों के आसपास सन्नाटा पसरा रहता है।
गर्मी के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब शहर में पेयजल की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में इन प्लांटों का बंद होना आमजन के लिए परेशानी का कारण बनता है। जिला अस्पताल के बाहर लगे प्लांट के बंद होने से मरीजों और उनके परिजनों को विशेष कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
निगम प्रशासन ने दिए जल्द सुधार के संकेत–
इस संबंध में नगर निगम कमिश्नर प्रकाश सर्वे से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि शहर में स्थापित आरओ वॉटर प्लांटों को पुनः संचालित करने के लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। टेंडर पूर्ण होने के बाद संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी तय एजेंसी को सौंपी जाएगी, जिससे प्लांटों की नियमित देखरेख सुनिश्चित हो सके।
कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि निगम प्रशासन इस व्यवस्था को फिर से सुचारु करने के लिए गंभीर है और शीघ्र ही नागरिकों को सस्ती दर पर स्वच्छ पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
जनता की निगाहें निगम की कार्रवाई पर–
फिलहाल शहर के कई प्रमुख स्थलों पर लगे आरओ वॉटर प्लांट जर्जर हालत में बंद पड़े हैं। जिन योजनाओं को आमजन की सुविधा के लिए शुरू किया गया था, वे अब खुद प्रशासनिक उदासीनता की प्रतीक बनती नजर आ रही हैं।
अब शहरवासियों की नजर नगर निगम की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। देखने वाली बात होगी कि टेंडर प्रक्रिया कितनी जल्द पूरी होती है और कब तक ये प्लांट दोबारा चालू होकर लोगों की प्यास बुझा पाते हैं। यदि समय रहते इनकी मरम्मत और नियमित देखरेख सुनिश्चित नहीं की गई, तो सस्ती पेयजल की यह महत्वपूर्ण योजना सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह जाएगी।