
आदिवासी अंचल को रेल से जोड़ने पहल, अटल श्रीवास्तव ने उठाई नई लाइन की मांग
आदिवासी अंचल को रेल से जोड़ने पहल, अटल श्रीवास्तव ने उठाई नई लाइन की मांग
बिलासपुर। कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने आदिवासी अंचलों की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर पेंड्रा से अमरकंटक, डिंडोरी, मंडला, घंसौर, लखनादौन होते हुए गोटेगांव तक नई रेल लाइन के निर्माण की मांग की है। इस प्रस्ताव को क्षेत्रीय विकास के लिहाज से अहम बताया जा रहा है।
विधायक ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि अमरकंटक, डिंडोरी, मंडला और आसपास के आदिवासी क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों और पर्यटन की दृष्टि से समृद्ध होने के बावजूद अब तक मजबूत रेल नेटवर्क से वंचित हैं। उन्होंने बताया कि इस रेल लाइन के लिए पूर्व में सर्वे भी किया जा चुका है, लेकिन परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
प्रस्तावित रेल लाइन पेंड्रा को पहले से जुड़े बिलासपुर-हावड़ा रूट से जोड़ते हुए गोटेगांव के जरिए इटारसी-जबलपुर-दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल कॉरिडोर से कनेक्ट करेगी। इससे छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच सीधी और वैकल्पिक रेल कनेक्टिविटी विकसित होगी, जिससे यात्रा समय और लागत दोनों में कमी आएगी।
विधायक के अनुसार, इस परियोजना से जहां एक ओर जबलपुर, इटारसी और नागपुर जैसे प्रमुख जंक्शनों तक पहुंच आसान होगी, वहीं दूसरी ओर यह पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी कॉरिडोर के रूप में भी कार्य कर सकती है।
परियोजना के संभावित लाभों में निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, स्थानीय व्यापार और कृषि व वन उपज को बड़े बाजार तक पहुंच, साथ ही छोटे शहरों में लॉजिस्टिक हब के विकास की संभावना शामिल है। इससे युवाओं के लिए नए आर्थिक अवसर भी पैदा होंगे।
धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से भी यह रेल लाइन महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे अमरकंटक जैसे राष्ट्रीय स्तर के तीर्थ स्थल तक पहुंच आसान होगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय व्यवसाय को लाभ होगा।
विधायक ने यह भी बताया कि डिंडोरी, मंडला, घंसौर और लखनादौन जैसे क्षेत्र आदिवासी बहुल हैं, जहां इस रेल परियोजना के माध्यम से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार आएगा।
अपने पत्र में विधायक अटल श्रीवास्तव ने इस परियोजना को जनहित और राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए शीघ्र सर्वे, बजट स्वीकृति और निर्माण कार्य शुरू करने की मांग की है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेंगे।
यदि यह रेल लाइन स्वीकृत होकर धरातल पर उतरती है, तो यह केवल एक परिवहन परियोजना नहीं बल्कि आदिवासी अंचलों के लिए विकास की नई जीवनरेखा साबित होगी और छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कनेक्टिविटी को नया आयाम देगी।
