
सिम्स में रात का ‘जंगलराज’! नशेड़ियों के डर से मेडिकल स्टोर का शटर बंद, मरीज लौट रहे बिना दवा लिए!
बाहर शटर बंद दिखते ही लोग समझ रहे दुकान बंद, इमरजेंसी मरीजों की बढ़ रही मुसीबत
बिलासपुर। सिम्स परिसर में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब यहां मरीजों से ज्यादा नशेड़ियों का दबदबा नजर आ रहा है। धनवंतरी मेडिकल स्टोर, जहां सस्ती जेनरिक दवाइयां मिलती हैं, वह रात होते ही असामाजिक तत्वों के आतंक के कारण लगभग ठप पड़ जाता है।
मेडिकल स्टोर कर्मचारियों का आरोप है कि देर रात दुकान के बाहर नशेड़ियों का जमावड़ा लग जाता है। ये लोग पानी, पेपर और अन्य चीजों की मांग करते हैं और मना करने पर गाली-गलौज और अभद्रता करते हैं। लगातार बढ़ती इन घटनाओं के चलते स्टाफ को मजबूरी में बाहर की ओर खुलने वाला शटर बंद करना पड़ रहा है।
यहीं से शुरू होती है असली परेशानी। बाहर का शटर बंद रहने के कारण दूर से आने वाले लोगों को लगता है कि मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद है। ऐसे में कई मरीज बिना दवाई लिए ही वापस लौट जाते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि रात के समय जो भी व्यक्ति दवाई लेने आता है, वह निश्चित रूप से इमरजेंसी में ही आता है—फिर भी उसे दवा नहीं मिल पा रही।
अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर यह स्थिति न सिर्फ व्यवस्था की पोल खोल रही है, बल्कि मरीजों की जान से भी खिलवाड़ कर रही है। एक तरफ सरकार सस्ती दवा योजना चला रही है, दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर हालात ऐसे हैं कि जरूरतमंद तक दवा पहुंच ही नहीं पा रही।
स्टाफ का यह भी कहना है कि इस समस्या की सूचना कई बार सिम्स चौकी में की जा चुकी है, लेकिन हर बार औपचारिक जवाब देकर मामला टाल दिया जाता है। पुलिस का रवैया भी सवालों के घेरे में है—क्या उन्हें रोज हो रही इन घटनाओं की जानकारी नहीं, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?
अस्पताल के बाहर ऑटो और सवारी वाहनों का अड्डा बना हुआ है, जहां खुलेआम नशा होता है और वही लोग बाद में मेडिकल स्टोर के आसपास हंगामा करते हैं। फिलाल हमारी जानकारी में 15-20 दिनों से तो यही सिलसिला जारी है, इसके और कितने पहले से चल रहा होगा…. लेकिन न सख्ती दिख रही है और न ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो रही है।
रात 12 के बाद शटर डाउन, इमरजेंसी मरीजों की बढ़ी परेशानी
लगातार खतरे के चलते मेडिकल स्टोर स्टाफ रात 12 बजे के बाद बाहर का शटर बंद कर देता है। इससे दूर से आने वाले लोगों को दुकान बंद नजर आती है और वे बिना दवा लिए ही लौट जाते हैं। जबकि हकीकत यह है कि रात में दवा लेने आने वाला हर व्यक्ति इमरजेंसी में होता है। ऐसे में यह स्थिति सीधे तौर पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ जैसी बन गई है।
“ऐसी कोई सूचना अभी तक नहीं मिली है, आपसे ही जानकारी मिल रही है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी, परिसर के अंदर हो या बाहर पुलिस कहीं भी कार्रवाई कर सकती है।”
— चंद्र प्रकाश पांडे, प्रभारी, सिम्स चौकी
फिलहाल, सिम्स में हालात ऐसे हैं कि मरीज इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन व्यवस्था की लापरवाही उन्हें निराश कर रही है।
नशेड़ियों का डर, बंद शटर और बेपरवाह सिस्टम—तीनों मिलकर हालात को और भयावह बना रहे हैं।
अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही किसी बड़ी अनहोनी की वजह बन सकती है।
यह खबर उपलब्ध साक्ष्यों (वीडियो एवं तस्वीरों) के आधार पर प्रकाशित की गई है।
