
FAKE MARKSHEET! फर्जी अंकसूची के सहारे नौकरी पाने का आरोप, वार्ड ब्वाय की शैक्षणिक योग्यता पर उठे सवाल
आठवीं की अंकसूची सत्यापन में सामने आई गंभीर विसंगतियां
बिलासपुर। शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय बिलासपुर में पदस्थ वार्ड ब्वाय महावीर साहू की शैक्षणिक योग्यता को लेकर नया विवाद सामने आया है। नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान शिक्षा विभाग ने उनकी आठवीं कक्षा की अंकसूची और उससे संबंधित प्रमाणन दस्तावेजों पर गंभीर संदेह व्यक्त किया है। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि वर्ष 2008 की पूर्व माध्यमिक परीक्षा की जिस अंकसूची का उपयोग नियुक्ति प्रक्रिया में किए जाने का आरोप है, उसकी वैधता को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गए हैं।
शिकायत मिलने के बाद शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय प्रशासन ने संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के लिए शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी थी। जांच के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जांजगीर-चांपा ने बताया कि संबंधित विद्यालय वर्तमान में सक्ती जिले के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए प्रत्यक्ष सत्यापन उनके स्तर पर संभव नहीं है। हालांकि उपलब्ध अभिलेखों और पुराने पत्राचार की जांच में कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं।
जांच में पाया गया कि वर्ष 2015 के जिस पत्र के आधार पर अंकसूची को प्रमाणित बताया जा रहा था, वह जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी नहीं हुआ था। विभागीय परीक्षण में यह भी सामने आया कि पत्र पर अंकित तत्कालीन अधिकारी के हस्ताक्षर संदिग्ध प्रतीत होते हैं तथा संबंधित पत्र क्रमांक का कोई उल्लेख जावक रजिस्टर में नहीं मिला। इसके बाद विभाग ने दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए उन्हें संदेहास्पद माना है।
इस संबंध में संयुक्त संचालक शिक्षा, बिलासपुर संभाग ने भी शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय को पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित अंकसूची के वैध रूप से जारी होने की पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की जानकारी कलेक्टर सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है। अब पूरे प्रकरण में आगे प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
जांच में क्या-क्या सामने आया
दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान वर्ष 2015 के जिस प्रमाणन पत्र का हवाला दिया गया था, उसकी वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिक्षा विभाग की जांच में संबंधित पत्र कार्यालय के अभिलेखों में दर्ज नहीं मिला। जावक रजिस्टर में भी उक्त क्रमांक का कोई रिकॉर्ड नहीं पाया गया। साथ ही पत्र पर अंकित हस्ताक्षरों को लेकर भी संदेह व्यक्त किया गया है। इन तथ्यों के आधार पर विभाग ने दस्तावेजों को संदिग्ध श्रेणी में रखा है और आगे जांच की अनुशंसा की है।
नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता की भी हो सकती है जांच
जांच में फर्जीवाड़ा साबित हुआ तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यदि आगामी जांच में अंकसूची अथवा उससे संबंधित दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता की भी जांच हो सकती है। ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई, सेवा संबंधी पुनर्विचार और अन्य कानूनी पहलुओं की भी समीक्षा की जाती है। फिलहाल संबंधित विभाग दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि के लिए उपलब्ध अभिलेखों और पत्राचार का परीक्षण कर रहा है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी
फिलहाल के जांच चल रही है एक संबंध में प्राचार्य जी ही बता पाएंगे – बृजेश सिंह, जांच अधिकारी
फिलहाल इस पर जांच चल रही है अभी प्रक्रियाधीन है,पूरी होने के बाद कार्यवाई होगी- जी आर चतुर्वेदी, प्राचार्य, शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय
