
ब्लाइंड स्कूल चोरी कांड: दो कर्मचारी बाहर, तीसरे पर मेहरबानी क्यों?.. क्या जांच होने पर बड़े खुलासे का है डर!
सीसीटीवी फुटेज होने के बावजूद FIR नहीं, लिखित आदेश के बाद भी कार्रवाई अटकी
बिलासपुर। तिफरा स्थित शासकीय दृष्टिबाधित विद्यालय (ब्लाइंड स्कूल) में हुई चोरी की घटना अब केवल चोरी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पूरे मामले में प्रशासनिक उदासीनता और जिम्मेदारी से बचने की कोशिशें भी सवालों के घेरे में आ गई हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि चोरी की घटना का सीसीटीवी फुटेज अधिकारियों के पास मौजूद होने और विभागीय जांच में कर्मचारियों की भूमिका सामने आने के बावजूद आज तक पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है।
जानकारी के अनुसार मामले की जांच के बाद सदानंद और राजू नामक दो कर्मचारियों को संस्था से हटा दिया गया, जबकि तीसरे कर्मचारी रामेश्वर को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि जांच में तीनों की भूमिका सामने आई थी तो दो कर्मचारियों पर कार्रवाई और तीसरे को कथित राहत दिए जाने के पीछे क्या कारण हैं, यह बड़ा सवाल बन गया है।
मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि समाज कल्याण विभाग के संयुक्त संचालक टी.पी. भावे ने चोरी की घटना में एफआईआर दर्ज कराने के लिए संस्था को लिखित निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद आज तक किसी भी थाने में अपराध दर्ज नहीं हुआ। सरकारी संस्था में चोरी, जांच रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और विभागीय आदेश के बावजूद पुलिस कार्रवाई न होना पूरे प्रकरण पर पर्दा डालने की आशंका को बल दे रहा है।
जब इस संबंध में विद्यालय प्रशासन और विभागीय अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो सभी के बयान अलग-अलग सामने आए। मुख्य अधीक्षक ने बताया कि सक्षम अधिकारी द्वारा जांच समिति गठित की गई थी और उसका प्रतिवेदन संयुक्त संचालक कार्यालय को भेज दिया गया है। हालांकि एफआईआर दर्ज न होने के संबंध में उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
वहीं संयुक्त संचालक टी.पी. भावे ने कहा कि उन्होंने एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखित आदेश जारी कर दिए थे। आदेश के बाद भी मामला दर्ज नहीं होने के सवाल पर उन्होंने इसकी जिम्मेदारी संस्था प्रशासन पर डालते हुए कहा कि इसकी जानकारी अधीक्षक ही दे सकते हैं।
दूसरी ओर मुख्य अधीक्षक बबीता कमलेश ने कहा कि एफआईआर संबंधी विषय प्रशासनिक अधिकारी के कार्यक्षेत्र का है और वही बेहतर जानकारी दे सकते हैं। जबकि प्रशासनिक अधिकारी प्रशांत द्विवेदी ने स्वयं को अस्थायी कर्मचारी बताते हुए कहा कि उनके स्टॉक मिलान में कोई कमी नहीं पाई गई थी और एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चोरी की घटना का सीसीटीवी फुटेज मौजूद होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस कार्रवाई नहीं हुई। यदि फुटेज में घटना और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट है तो फिर अपराध दर्ज करने में देरी क्यों की जा रही है? वहीं तीसरे कर्मचारी की स्थिति को लेकर भी विरोधाभासी जानकारी सामने आ रही है। संयुक्त संचालक का कहना है कि उसे भी हटा दिया गया है, जबकि संस्था स्तर पर इसकी स्पष्ट पुष्टि नहीं हो पा रही है।
सरकारी विद्यालय में चोरी, जांच समिति की रिपोर्ट, कथित सीसीटीवी फुटेज और एफआईआर के लिखित निर्देश के बावजूद कार्रवाई का न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर किसे बचाने की कोशिश की जा रही है और चोरी जैसे मामले में अपराध दर्ज कराने में इतनी देरी क्यों हो रही है।
जवाब मांग रहे हैं ये सवाल
तिफरा ब्लाइंड स्कूल में चोरी की घटना हुई, जांच हुई, कर्मचारियों को हटाया गया और अधिकारियों के पास सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद है। इसके बावजूद पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं हुई। यदि जांच में आरोप सही पाए गए थे तो मामला पुलिस तक क्यों नहीं पहुंचा? यदि आरोप गलत थे तो दो कर्मचारियों को सेवा से हटाया क्यों गया? तीसरे कर्मचारी को लेकर अधिकारियों के अलग-अलग बयान क्यों सामने आ रहे हैं? संयुक्त संचालक के लिखित आदेश के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो आदेश की अवहेलना के लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी भी अधिकारी के पास नहीं हैं, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसमें यह भी आशंका हो रही है कि इस घटना की जांच होने पर कई बड़े कुलसी भी हो सकते हैं
प्रमुख बयान
“इस घटना में एफआईआर दर्ज कराने के लिए मैंने लिखित आदेश दिए थे। तीसरे कर्मचारी को लेकर पूछने पर बता सकता हूं कि उसे भी हटा दिया गया है।”
— टी.पी. भावे, संयुक्त संचालक, समाज कल्याण विभाग
“आदेश तो किए गए थे, लेकिन वहां प्रशासनिक अधिकारी बैठते हैं। उन्होंने एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई, इसकी जानकारी वही दे सकते हैं।”
— बबीता कमलेश, मुख्य अधीक्षक
“मुझे नहीं पता एफआईआर क्यों नहीं हुई। मैंने अपना स्टॉक मिलान किया था, उसमें कोई कमी नहीं थी। विभागीय जांच में क्या आया, इसकी जानकारी मुझे नहीं है।”
— प्रशांत द्विवेदी, प्रशासनिक अधिकारी
