
सेवा सहकारी समिति पोड़ी में नियम विरुद्ध नियुक्ति का मामला ठंडे बस्ते में?
दो साल से विवाद बरकरार, जांच अधूरी, अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल
अक्टूबर 2025 में ग्रामीणों-सरपंच ने की थी शिकायत, अब तक नहीं हुई ठोस कार्रवाई
बिलासपुर। सेवा सहकारी समिति मर्यादित पोड़ी पं.क्र. 668 में प्रभारी संस्था प्रबंधक की कथित नियम विरुद्ध नियुक्ति का मामला अब केवल नियुक्ति विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विभागीय जांच में हो रही देरी और अधिकारियों की लापरवाही भी सवालों के घेरे में आ गई है। लगभग दो वर्षों से ग्रामीणों और किसानों द्वारा लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन अब तक न जांच पूरी हो सकी और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जवाब सामने आया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित प्रभारी संस्था प्रबंधक रुद्रदत्त तिवारी की नियुक्ति नियमों के विरुद्ध की गई थी। नियुक्ति के बाद से समिति की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। किसानों को खाद वितरण, केसीसी सुविधा और अन्य जरूरी कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मामले को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर आखिरकार अक्टूबर 2025 में ग्रामीणों और ग्राम सरपंच ने सहकारिता विभाग को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
शिकायत में यूरिया खाद की कथित ब्लैक मार्केटिंग, खाद वितरण में गड़बड़ी, धान गबन तथा स्टॉक रिकॉर्ड और वास्तविक उपलब्धता में अंतर जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
मामले में सहकारिता विस्तार अधिकारी एवं जांच अधिकारी कैलाश कश्यप द्वारा रुद्रदत्त तिवारी को 23 फरवरी को कार्यालय में उपस्थित होकर प्रमाण सहित अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था। जब इस संबंध में जांच अधिकारी से पूछा गया कि सुनवाई के बाद क्या कार्रवाई हुई और जांच किस स्थिति में है, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि “आप उप पंजीयक कार्यालय से संपर्क करें, वही बता पाएंगे।” इससे यह सवाल और गहरा गया है कि आखिर जांच आगे बढ़ी भी या नहीं।
वहीं उप पंजीयक चंद्रशेखर जायसवाल का कहना है कि “यह दो साल पुराना मामला है। शिकायत आई है लेकिन मुझे प्रतिवेदन नहीं मिला है। प्रतिवेदन आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। मुझे यहां आए ज्यादा समय नहीं हुआ है।” ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जांच अधिकारी द्वारा नोटिस जारी कर जवाब लिया जा चुका है, तो प्रतिवेदन आखिर अब तक लंबित क्यों है?
इधर समिति प्रबंधक रुद्रदत्त तिवारी ने भी फोन पर जवाब देने से इनकार करते हुए कहा कि “मैं फोन पर कोई बात नहीं करूंगा, पत्रकारों से फोन पर बात करने में डर लगता है, मिलकर बात करूंगा।” इससे मामले को लेकर और संदेह गहराने लगा है।
नियम 24 के उल्लंघन का आरोप
शिकायत में सहकारी समितियों के नियम क्रमांक 24 का हवाला देते हुए कहा गया है कि कर्मचारियों के आदान-प्रदान अथवा स्थानांतरण के लिए दोनों कर्मचारियों की सहमति, संबंधित सोसायटी बोर्ड की अनुमति और संभागीय संयुक्त पंजीयक की लिखित स्वीकृति आवश्यक होती है। आरोप है कि नियुक्ति प्रक्रिया में इन नियमों का पालन नहीं किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग समय रहते कार्रवाई करता तो मामला इतना लंबा नहीं खिंचता। अब जांच में लगातार हो रही देरी और जिम्मेदार अधिकारियों के गोलमोल जवाबों ने सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
