
सूचना देने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, तेज बारिश में स्वामी आत्मानंद स्कूल की फॉल सीलिंग गिरी
देर रात हादसा होने से टली बड़ी घटना, स्कूल संचालन के दौरान गिरती तो बच्चों की जान पर बन सकती थी
बिलासपुर। बेहतर सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दावा करने वाले शिक्षा विभाग की व्यवस्था की पोल मगरपारा रोड स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल में खुल गई। रविवार देर रात तेज बारिश के दौरान स्कूल की चार कक्षाओं की फॉल सीलिंग अचानक भरभराकर नीचे गिर गई। गनीमत रही कि हादसा छुट्टी के दिन रात में हुआ, जिससे किसी छात्र या शिक्षक को चोट नहीं आई। यदि यही घटना स्कूल संचालन के दौरान होती तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।
रविवार सुबह स्कूल का प्यून कमरों की साफ-सफाई के लिए पहुंचा। कमरे का दरवाजा खोलने पर फॉल सीलिंग गिरी होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद स्कूल प्रबंधन को इसकी सूचना दी गई। बताया गया कि प्राचार्य कक्ष, कक्षा छठवीं, कंप्यूटर रूम सहित चार कमरों की फॉल सीलिंग बारिश के दौरान गिर गई। बताया जा रहा है कि छत से पानी रिसकर फॉल सीलिंग में भर गया था, जिसके चलते उसका एक बड़ा हिस्सा ढह गया।
घटना के बाद सोमवार को स्कूल में छुट्टी कर दी गई। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि भवन की जर्जर स्थिति और मरम्मत की आवश्यकता को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों को पहले ही अवगत कराया जा चुका था, लेकिन समय पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शिक्षकों के अनुसार स्कूल में यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। बारिश के दौरान परिसर में पानी भरना भी आम बात है। कई बार अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।
बताया जा रहा है कि घटना के बाद प्राचार्य सुधा गोपाल डीईओ कार्यालय पहुंचीं और मामले की जानकारी दी। वहीं बिल्हा बीईओ ने मामले की जानकारी पहले से होने से इनकार करते हुए स्कूल का निरीक्षण कराने और जिला शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट सौंपने की बात कही है।
प्राचार्य सुधा गोपाल का कहना है कि छत की फ्लोरिंग की मरम्मत का मुद्दा पहले भी एसएमसी पदाधिकारियों के समक्ष रखा गया था। शिक्षा विभाग को भी इसकी जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यदि यह हादसा दिन के समय होता तो छात्रों के साथ बड़ी घटना घट सकती थी।
प्राचार्य के मुताबिक विधायक अमर अग्रवाल ने हाल ही में स्कूल भवन की मरम्मत के लिए 15 लाख रुपये की घोषणा की है। इससे स्कूल भवन की मरम्मत होने की उम्मीद जगी है।
इस घटना ने सरकारी स्कूलों में सुरक्षा और भवनों के रखरखाव की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन मरम्मत को लेकर कितनी तेजी से कदम उठाता है या यह मामला भी एक बार फिर आश्वासन तक ही सीमित रह जाता है।
