
युवक की मौत के बाद अलर्ट मोड में एटीआर, कैमरों से बाघिन की निगरानी; ग्रामीणों को जंगल से दूर रहने की चेतावनी
बिलासपुर। अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) के प्रतिबंधित वन क्षेत्र में बाघिन के हमले में युवक की मौत के बाद वन विभाग ने सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था और कड़ी कर दी है। 24 अगस्त को हुई इस घटना के बाद वन विभाग की टीमें लगातार संवेदनशील इलाकों में गश्त कर रही हैं। घटना स्थल के आसपास अतिरिक्त कैमरे लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से वन क्षेत्र में वन्यप्राणियों के साथ-साथ लोगों की आवाजाही पर भी नजर रखी जा रही है।
वन विभाग के अनुसार, जिस इलाके में युवक पर हमला हुआ था, वहां बाघिन अपने शावकों के साथ मौजूद है। शावकों के साथ होने के कारण बाघिन के व्यवहार को देखते हुए क्षेत्र को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को जंगल की ओर नहीं जाने की सख्त हिदायत दी है। खासतौर पर कोर और प्रतिबंधित वन क्षेत्र में किसी भी स्थिति में प्रवेश नहीं करने की अपील की गई है।
प्रतिबंध के बावजूद जंगल पहुंच रहे ग्रामीण
24 अगस्त को ग्राम बांधा निवासी धरमजीत धृतलहरे अपने कुछ साथियों के साथ जंगल के अंदर गया था। पाड़ाडोंगरी के पास बाघिन ने उस पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। वन विभाग की प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक उस समय बाघिन के साथ दो से तीन शावक भी मौजूद थे। घटना के बाद वन विभाग ने पूरे इलाके में निगरानी बढ़ाते हुए ग्रामीणों को लगातार समझाइश देना शुरू किया है।
वन विभाग का कहना है कि जंगल में वन्यप्राणियों की मौजूदगी के बीच मानव आवाजाही से मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश पूरी तरह रोकना जरूरी है।
15 जून से 31 अक्टूबर तक प्रवेश पर रोक
वन विभाग ने बताया कि मानसून अवधि के दौरान 15 जून से 31 अक्टूबर तक टाइगर रिजर्व के कोर एवं प्रतिबंधित वन क्षेत्रों में प्रवेश वर्जित रहता है। वन्यप्राणियों के प्रजनन काल और मानसून के दौरान जंगल की संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए टाइगर रिजर्व एवं अभयारण्यों में पर्यटन गतिविधियों पर भी रोक रहती है।
इसके बावजूद कुछ ग्रामीण करील, पुटू और अन्य वन उपज संग्रह करने के लिए जंगल के अंदर पहुंच जाते हैं। वन विभाग ऐसे लोगों को लगातार समझाइश दे रहा है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में जाना उनकी जान के लिए भी खतरा बन सकता है। एसटीपीएफ के जवानों और पैदल गश्ती दल के माध्यम से संवेदनशील इलाकों में निगरानी के साथ ग्रामीणों को जंगल में प्रवेश नहीं करने की चेतावनी दी जा रही है।
कैमरों से बाघिन और शावकों की गतिविधियों पर नजर
युवक की मौत के बाद एटीआर प्रबंधन ने घटना वाले क्षेत्र में अतिरिक्त कैमरे लगाए हैं। कोर एरिया और आसपास के संवेदनशील हिस्सों की लगातार निगरानी की जा रही है। कैमरों के माध्यम से बाघिन और उसके शावकों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, ताकि उनकी आवाजाही और व्यवहार की जानकारी लगातार मिलती रहे।
वन विभाग की टीमें क्षेत्र में गश्त कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विभाग का प्रयास है कि बाघिन और उसके शावकों को किसी तरह की परेशानी न हो और ग्रामीण भी सुरक्षित रहें। इसके लिए संवेदनशील क्षेत्र में मानव आवाजाही को नियंत्रित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि मानसून अवधि में प्रतिबंधित और अंदरूनी वन क्षेत्रों में जाने से पूरी तरह बचें। जंगल से जुड़ी किसी भी गतिविधि के दौरान वन विभाग के सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सावधानी और प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश से परहेज ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।
