
अपराधियों पर पुलिस का शिकंजा, ‘एक गुंडा-एक जवान’ नीति लागू
बिलासपुर। रेंज में अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और निवारक पुलिसिंग को मजबूत बनाने के लिए पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने उच्च स्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित कर पुलिस अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। बैठक में रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी और थाना प्रभारी सहित करीब 200 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।
कार्यशाला में पुलिस अधीक्षक सक्ती प्रफुल्ल ठाकुर ने ‘गुंडा एवं निगरानी बदमाश’ विषय पर प्रस्तुतीकरण देते हुए प्रिवेंटिव पुलिसिंग और बेसिक पुलिसिंग की पुनर्स्थापना पर विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद आईजी ने अपराधियों की निगरानी और कार्रवाई के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने के निर्देश दिए।
निर्देशों के अनुसार आदतन चोर, लुटेरे और अन्य अपराधियों का पुलिस रेगुलेशन के तहत वर्गीकरण कर उनका फोटो, फिंगरप्रिंट, बैंक खातों सहित पूरा रिकॉर्ड अद्यतन रखा जाएगा। गंभीर अपराधियों की गैंग हिस्ट्री शीट तैयार की जाएगी। बदमाशों की सघन और अनिश्चित समय पर सरप्राइज चेकिंग की जाएगी तथा पुलिस टीमों के लिए सुरक्षा संबंधी एसओपी का पालन अनिवार्य होगा।

आईजी ने ‘एक गुंडा-एक जवान’ नीति लागू करते हुए प्रत्येक निगरानीशुदा बदमाश की जिम्मेदारी एक पुलिसकर्मी को सौंपने के निर्देश दिए। जमानत पर छूटने के बाद दोबारा अपराध करने वालों की जमानत निरस्त कराने, बीएनएसएस की धारा 110 के तहत बाउंड ओवर, जिला बदर और एनडीपीएस कानून के प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई करने को कहा गया। फरार अपराधियों की तलाश के लिए नेटग्रिड और सीडीआर जैसे तकनीकी संसाधनों का भी उपयोग किया जाएगा।
कार्यशाला में रोजनामचा, रजिस्टरों और बीट नोटबुक के व्यवस्थित संधारण, ग्राम अपराध नोटबुक को अद्यतन रखने, कोटवारों एवं पुलिस मित्रों के सहयोग से सूचना तंत्र मजबूत करने और अंतरराज्यीय अपराधियों की जानकारी क्राइमैक (Cri-MAC) प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा करने के निर्देश दिए गए।
आईजी राम गोपाल गर्ग ने स्पष्ट किया कि मानवाधिकार और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन किया जाएगा तथा विमुक्त जनजातियों, पिछड़े वर्गों और नाबालिगों के खिलाफ किसी भी प्रकार की मनमानी कार्रवाई नहीं की जाएगी। वहीं जो लोग वर्षों पहले अपराध छोड़कर सामान्य जीवन जी रहे हैं, उन्हें समीक्षा के बाद निगरानी सूची से हटाने की भी व्यवस्था रहेगी।
उन्होंने कहा कि पुलिस का मुख्य लक्ष्य सक्रिय अपराधियों पर प्रभावी निगरानी रखते हुए अपराध की पुनरावृत्ति रोकना है। राष्ट्रीय पर्वों और प्रमुख त्योहारों से पहले थानों में गुंडा-बदमाशों की परेड कर उनकी गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी। बैठक के अंत में आईजी ने सभी पुलिस अधीक्षकों को इन निर्देशों की स्वयं निगरानी कर उनका कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
