
सेजेस तिलकनगर के फेल छात्रों को पुनर्मूल्यांकन का सहारा, डीईओ ने दिए उत्तरपुस्तिकाएं जांचने के निर्देश
बिलासपुर। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय (सेजेस) तिलकनगर में कक्षा 9वीं और 11वीं के बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के फेल होने के बाद अब छात्रों को पुनर्मूल्यांकन (रीवैल्यूएशन) का सहारा मिलेगा। जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. अजय कौशिक ने फेल हुए विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराने के निर्देश दिए हैं। इससे छात्रों और अभिभावकों में बेहतर परिणाम की उम्मीद जगी है।
जानकारी के अनुसार विद्यालय में कक्षा 9वीं के 45 तथा कक्षा 11वीं के 22 छात्र-छात्राएं फेल घोषित किए गए हैं। परीक्षा परिणाम के बाद नाराज अभिभावकों ने पहले स्कूल का घेराव किया और बाद में कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर छात्रहित में उचित विकल्प या विशेष अवसर देने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा था। उस दौरान कलेक्टर कार्यालय से उत्तरपुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराने का आश्वासन मिला था।
इसी सिलसिले में छात्र-छात्राएं जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचीं और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया की जानकारी ली। इस पर डीईओ ने बताया कि सभी फेल विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराया जाएगा। इसके बाद छात्र-छात्राओं और उनके पालकों को परिणाम में सुधार की उम्मीद है।
प्रमोट करने के बाद फिर रोका, पालकों ने उठाए सवाल-
इस मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया था, जब पालकों और छात्रों ने आरोप लगाया कि विद्यालय प्रबंधन ने पहले उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट होने की जानकारी दी। कई विद्यार्थियों ने नई कक्षा की किताबें और कॉपियां भी खरीद लीं तथा कक्षाओं में बैठना शुरू कर दिया। बाद में उन्हें यह कहकर कक्षा से बाहर कर दिया गया कि कलेक्टर के निर्देश पर उन्हें पिछली कक्षा में ही पढ़ना होगा।
नाराज पालकों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का फेल होना केवल उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था, समय पर पाठ्यक्रम पूरा नहीं होने और मूल्यांकन प्रक्रिया की खामियों का परिणाम है। इसी कारण उन्होंने छात्रहित में न्याय की मांग की थी।
ग्रेस अंक को लेकर भी उठे सवाल-
डीईओ कार्यालय पहुंचे कुछ विद्यार्थियों ने ग्रेस अंक को लेकर भी शिकायत की। उनका कहना था कि वे केवल दो से चार अंकों से फेल हुए, लेकिन उन्हें सात अंक ही ग्रेस के रूप में दिए गए, जबकि 10 अंक तक ग्रेस देने का प्रावधान बताया जाता है। जानकारी के अनुसार ग्रेस अंक मिलने के बाद एक छात्र पास भी हो गया और उसे अगली कक्षा में प्रवेश मिल गया है।
छात्रों का कहना है कि यदि पात्र विद्यार्थियों को नियमानुसार ग्रेस अंक दिए जाएं तो कई और छात्र पास हो सकते हैं। फिलहाल फेल हुए विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की निगाहें अब पुनर्मूल्यांकन के परिणाम पर टिकी हैं, जिससे इस शैक्षणिक सत्र का भविष्य तय होगा।
